किराया बनाम ख़रीद कैलकुलेटरRent vs Buy Calculator

EMI, किराया, घर की कीमत का बढ़ना, और बचे पैसे का निवेश: सब जोड़कर देखिए कि आख़िर में किसके पास ज़्यादा संपत्ति होगी।

घर ख़रीदना

किराये पर रहना

और

फ़ैसला
—

कुल संपत्ति, साल-दर-साल

ख़रीदने परकिराये पर + निवेश

साल-दर-साल हिसाब

सालEMI + मेंटेनेंस (साल)किराया (साल)लोन बाक़ीख़रीदने पर संपत्तिकिराये पर संपत्ति

हिसाब कैसे लगता है

दोनों के पास शुरू में उतना ही पैसा माना गया है। ख़रीदने वाला डाउन पेमेंट, स्टांप ड्यूटी और इंटीरियर पर खर्च करता है; किराये वाला यही रक़म निवेश कर देता है। हर महीने जो भी कम खर्च करता है, वह फ़र्क़ निवेश करता है। आख़िर में:

  • ख़रीदने पर संपत्ति = घर की तब की कीमत (1% बेचने का खर्च घटाकर) − बाक़ी लोन + उसका अपना निवेश।
  • किराये पर संपत्ति = निवेश की कुल रक़म।

प्राइस-टू-रेंट अनुपात

घर की कीमत को साल भर के किराये से भाग दीजिए। बड़े शहरों में यह अक्सर 25–35 होता है, यानी किराया घर की कीमत का सिर्फ़ 3–4% सालाना। अनुपात जितना ज़्यादा, किराये पर रहना उतना सस्ता। 20 से कम हो तो ख़रीदना जल्दी फ़ायदे में आता है।

यह एक अनुमान है, सलाह नहीं। घर सिर्फ़ पैसे का फ़ैसला नहीं है: स्थिरता, बच्चों का स्कूल, और शहर बदलने की संभावना भी देखिए। बड़े फ़ैसले से पहले किसी वित्तीय सलाहकार से बात करें।

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