घर के उपकरण
हर चीज़ की गिनती और रोज़ कितने घंटे चलती है, भरिए। वॉट बदलना हो तो बदल सकते हैं (उपकरण के लेबल पर लिखा होता है)। गिनती 0 करने पर वह हिसाब में नहीं जुड़ेगी।
| उपकरण | वॉट | गिनती | घंटे / दिन | यूनिट / महीना |
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बिजली की दर
| यूनिट तक | ₹ / यूनिट |
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ये उदाहरण के स्लैब हैं। अपने बिजली बिल के पीछे या DISCOM की वेबसाइट पर दिए स्लैब डालिए।
अपने पिछले बिल में “कुल रक़म ÷ कुल यूनिट” करके असल रेट निकाल सकते हैं।
बिजली बचाने के तरीक़े (आपके हिसाब से)
रूफ़टॉप सोलर लगवाएँ तो?
यूनिट कैसे गिनते हैं
1 यूनिट = 1 किलोवॉट-घंटा (kWh), यानी 1,000 वॉट की चीज़ एक घंटा चले। फ़ॉर्मूला: वॉट × गिनती × घंटे ÷ 1,000 = रोज़ की यूनिट; इसे 30 से गुणा करके महीने की यूनिट। जैसे 75 वॉट का पंखा 10 घंटे रोज़: 75 × 10 ÷ 1000 = 0.75 यूनिट रोज़, यानी लगभग 22 यूनिट महीना।
- फ़्रिज दिन-रात प्लग में रहता है, लेकिन कंप्रेसर बीच-बीच में चलता है, इसलिए टूल उसका लगभग 40% समय मानता है।
- AC सबसे ज़्यादा बिजली खाता है। इन्वर्टर AC ठंडा होने के बाद कम चलता है; टूल उसे नॉन-इन्वर्टर से कम मानता है।
- स्लैब: ज़्यादातर राज्यों में जितनी ज़्यादा यूनिट, उतना महँगा रेट। इसलिए 10–20 यूनिट बचाने से आख़िरी, सबसे महँगे स्लैब की बचत होती है।
पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना
घर की छत पर सोलर के लिए केंद्र सरकार 1 kW पर ₹30,000, 2 kW पर ₹60,000, और 3 kW या उससे ज़्यादा पर अधिकतम ₹78,000 सब्सिडी देती है। आवेदन pmsuryaghar.gov.in पर अपने DISCOM के ज़रिए होता है। कुछ राज्य अलग से भी सब्सिडी देते हैं।
असली बिल आपके राज्य के स्लैब, मीटर किराया, फ़्यूल सरचार्ज और सब्सिडी पर निर्भर करता है। यह टूल अनुमान देता है।