उदाहरण का नाम और पता है; अपनी जानकारी अंग्रेज़ी (रोमन) अक्षरों में भरिए। PDF में हर पेज पर 2 रसीदें आती हैं। प्रिंट करके मकान मालिक से साइन करवाएँ।
पहली रसीद का प्रीव्यू
HRA पर टैक्स छूट (साल भर)
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HRA छूट सिर्फ़ पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलती है। नई व्यवस्था (जो अब डिफ़ॉल्ट है) में HRA पर छूट नहीं मिलती, इसलिए पहले देख लें कि आप कौन-सी व्यवस्था चुन रहे हैं।
रेंट रसीद के ज़रूरी नियम
- कब चाहिए: नौकरी वाले लोग पुरानी टैक्स व्यवस्था में HRA छूट के लिए हर साल (आम तौर पर जनवरी–मार्च) ऑफ़िस में रेंट रसीद और फ़ॉर्म 12BB जमा करते हैं।
- मकान मालिक का PAN: साल का किराया ₹1,00,000 से ज़्यादा हो (यानी लगभग ₹8,334 महीना से ऊपर) तो मकान मालिक का PAN देना ज़रूरी है। PAN न हो तो मालिक से लिखित घोषणा लें।
- रेवेन्यू स्टांप: नकद में ₹5,000 से ज़्यादा की रसीद पर ₹1 का रेवेन्यू स्टांप लगाकर मालिक उस पर साइन करते हैं। UPI, बैंक ट्रांसफ़र या चेक की रसीद पर स्टांप की ज़रूरत नहीं होती।
- सच का किराया लिखें: आयकर विभाग रेंट एग्रीमेंट, बैंक स्टेटमेंट और मालिक की ITR से किराया मिला सकता है। झूठी रसीद पर जुर्माना लग सकता है।
HRA छूट कैसे निकलती है
तीन में से जो सबसे कम हो, उतना HRA टैक्स-फ़्री होता है: (1) जितना HRA मिला, (2) दिया गया किराया − बेसिक+DA का 10%, (3) बेसिक+DA का 50% (दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई) या 40% (बाक़ी शहर)। बाक़ी HRA पर टैक्स लगता है।
यह टूल सहायता के लिए है, टैक्स सलाह नहीं। अपने CA या ऑफ़िस के HR से नियम पक्के कर लें।