पंचांग और शुभ मुहूर्तPanchang & Shubh Muhurat

किसी भी दिन और शहर का पूरा पंचांग, और आने वाले महीनों में शुभ काम के लिए सही दिन और समय।

दिन बदलें
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पंचांग के पाँच अंग

हर अंग के साथ वह समय दिया है जब तक वह रहेगा। पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है।

शुभ और अशुभ समय

चौघड़िया

चौघड़ियासमयफल

शुभ मुहूर्त खोजें

काम चुनिए। टूल हर दिन की तिथि, नक्षत्र, वार, भद्रा और राहु काल देखकर शुभ दिन और समय निकालता है। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास और शुक्र/गुरु अस्त के दिन भी ध्यान में रखे जाते हैं।

 

पंचांग कैसे पढ़ें

हिंदू पंचांग के पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्रमा और सूर्य के बीच का अंतर, हर 12° पर एक तिथि), नक्षत्र (चंद्रमा 27 नक्षत्रों में से किसमें है), योग (सूर्य और चंद्र की मिली हुई गति), करण (आधी तिथि), और वार (दिन)। पंचांग का दिन सूर्योदय से शुरू होता है, इसलिए रात 12 बजे तारीख़ बदलने पर भी तिथि वही रहती है।

राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है। हर वार के लिए एक हिस्सा राहु काल होता है (सोमवार को दूसरा, रविवार को आठवाँ)। इस समय नया काम शुरू करना टाला जाता है। क्योंकि दिन की लंबाई मौसम और शहर के साथ बदलती है, राहु काल का समय भी हर शहर में अलग होता है।

अभिजीत मुहूर्त

दिन के 15 मुहूर्तों में से आठवाँ, यानी दोपहर के आसपास लगभग 48 मिनट। इसे लगभग हर शुभ काम के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं लिया जाता।

चौघड़िया

दिन और रात दोनों को 8-8 हिस्सों में बाँटकर हर हिस्से को अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग नाम दिया जाता है। अमृत, शुभ और लाभ अच्छे माने जाते हैं; चर यात्रा के लिए ठीक है; उद्वेग, काल और रोग से बचते हैं। गुजरात और महाराष्ट्र में व्यापार और यात्रा के लिए चौघड़िया ज़्यादा देखा जाता है।

मुहूर्त खोजने वाला टूल कैसे काम करता है

हर काम के लिए शास्त्रों में कुछ नक्षत्र, तिथि और वार शुभ माने गए हैं। जैसे विवाह के लिए रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र। टूल इन नियमों को हर दिन पर लगाता है और सिर्फ़ वही समय दिखाता है जब तीनों साथ में शुभ हों, और भद्रा या (दिन के कामों में) राहु काल न हो।

यह टूल लग्न (उस समय उदित राशि) और वर-वधू की कुंडली नहीं देखता। विवाह जैसे बड़े काम के लिए तारीख़ तय करने से पहले अपने पंडित जी से कुंडली के हिसाब से समय पक्का करवा लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अलग-अलग वेबसाइट पर तिथि का समय थोड़ा अलग क्यों होता है?

हर पंचांग की गणना का तरीक़ा थोड़ा अलग होता है (अयनांश, सूर्योदय की परिभाषा)। यह टूल लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश इस्तेमाल करता है, जो भारत में सबसे ज़्यादा प्रचलित है, और सूर्य के ऊपरी किनारे के दिखने को सूर्योदय मानता है। इसलिए दूसरे अच्छे पंचांगों से फ़र्क़ आम तौर पर 1–2 मिनट का होता है।

अमांत और पूर्णिमांत महीने में क्या फ़र्क़ है?

अमांत में महीना अमावस्या पर ख़त्म होता है (गुजरात, महाराष्ट्र, दक्षिण भारत)। पूर्णिमांत में पूर्णिमा पर ख़त्म होता है (उत्तर भारत)। शुक्ल पक्ष का नाम दोनों में एक ही होता है; कृष्ण पक्ष में पूर्णिमांत वाला महीना एक आगे होता है।

चातुर्मास में शादी क्यों नहीं होती?

देवशयनी एकादशी (आषाढ़ शुक्ल 11) से देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल 11) तक के चार महीने चातुर्मास कहलाते हैं। परंपरा के अनुसार इन महीनों में विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन नहीं किए जाते। टूल इन दिनों को अपने आप हटा देता है।

खरमास क्या है?

जब सूर्य धनु या मीन राशि में होते हैं (लगभग 15 दिसंबर–14 जनवरी और 14 मार्च–13 अप्रैल), उस समय को खरमास कहते हैं। इस दौरान विवाह और गृह प्रवेश नहीं किए जाते।

और काम के टूल

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